ठंड के मौसम में शुगर मरीज बरतें विशेष सावधानी: डॉ गौरव अग्रवाल

ठंड के मौसम में शुगर मरीज बरतें विशेष सावधानी: डॉ गौरव अग्रवाल

वॉइस ऑफ़ बहादुरगढ़ न्यूज़ :
बहादुरगढ़ ।
शहर के दिल्ली रोहतक रोड़ पर डायबिटीज से पीड़ित मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए एक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ गौरव अग्रवाल ने कहा कि एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में जब चोट लगती है, तो उस जगह पर तुरंत खून आ जाता है। यह खून आना शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है जो संक्रमण से बचाव में मदद करता है। कुछ समय बाद उस घाव पर पपड़ी जमने लगती है, जो धीरे-धीरे सूख कर गिर जाती है और नीचे नई त्वचा बन जाती है। सामान्य जख्म में दर्द और जलन होती है, पर यह दर्द धीरे-धीरे कम होता जाता है क्योंकि खून का बहना, कोशिकाओं की मरम्मत और नई त्वचा का बनना नियमित रूप से चलता रहता है।वहीं दूसरी ओर, शुगर के मरीजों में जब घाव बनता है तो वह सामान्य तरीके से नहीं भरता। ब्लड शुगर का लेवल अधिक होने के कारण रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है और शरीर की हीलिंग क्षमता कम हो जाती है। ऐसे घावों में अक्सर खून नहीं आता या बहुत कम आता है। उस जगह पर पपड़ी नहीं जमती बल्कि जख्म नर्म और गीला सा बना रहता है। उसमें सफेद, काली या पीली परतें दिखाई दे सकती हैं, जो संक्रमण का संकेत देती हैं।शुगर वाउंड में दर्द भी सामान्य रूप से महसूस नहीं होता क्योंकि डायबिटीज़ के कारण नसों की संवेदना (नर्व सेंसिटिविटी) घट जाती है। घाव का क्षेत्र धीरे-धीरे गलने लगता है, और अगर ध्यान न दिया जाए तो यह संक्रमण फैलाकर गंभीर रूप ले सकता है। चाहे कितनी भी दवाइयाँ या क्रीम लगा ली जाएं, अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं है, तो जख्म भरना मुश्किल हो जाता है।ठंड के मौसम में शुगर मरीज बरतें विशेष सावधानीडायबिटीज़ के कई मरीजों को पैरों में ठंडा या गर्म महसूस ही नहीं होता। ऐसे लोगों को सर्दियों में पैरों की सिकाई, हीटर के पास बैठना या आग के पास पैर सेंकना नहीं करना चाहिए। संवेदना कम होने के कारण उन्हें जलन का एहसास नहीं होता और पैर जल सकते हैं। हर साल ठंड के मौसम में ऐसे कई मरीज आते हैं, जिनके पैर हीटर या आग से जल जाते हैं, और फिर वह घाव भरना बहुत कठिन हो जाता है। इसलिए शुगर के मरीज अपने पैरों को हमेशा गर्म मोज़ों से ढकें, परंतु हीटर या डायरेक्ट फायर से दूरी बनाए रखें।इसलिए डायबिटीज़ के मरीजों को अपने पैरों और शरीर के हर छोटे से छोटे जख्म पर ध्यान देना चाहिए। नियमित रूप से ब्लड शुगर चेक करना, डॉक्टर की सलाह से इलाज लेना और घाव को साफ व सूखा रखना बहुत ज़रूरी है। समय पर उपचार और सावधानी से ही ऐसे मामलों को गंभीर रूप में बदलने से रोका जा सकता है।डॉ गौरव अग्रवाल को मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित पुरस्कारडॉ गौरव अग्रवाल शहर के जाने माने उद्यमी हैं। उन्होंने एक अनूठी आयुर्वेदिक दवा विकसित की है जो उच्च रक्त शर्करा को नियंत्रित करती है और इसकी जटिलताओं को दूर करती है। उनकी दवा गैंगरीन रोगियों को अंग-विच्छेदन से बचने और अपनी गतिशीलता वापस पाने में भी मदद करती है। उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार व सम्मान भी मिल चुके हैं।

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