वोटर लिस्ट सर्वे और शिक्षकों की ड्यूटी से लोकतंत्र व शिक्षा दोनों खतरे में: प्रोफेसर सीमा प्रवीण दलाल

वोटर लिस्ट सर्वे और शिक्षकों की ड्यूटी से लोकतंत्र व शिक्षा दोनों खतरे में: प्रोफेसर सीमा प्रवीण दलाल

वॉइस ऑफ़ बहादुरगढ़ न्यूज़: बहादुरगढ़।
चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण और इसी प्रक्रिया में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर शिक्षाविद एवं सामाजिक चिंतक प्रोफेसर सीमा प्रवीण दलाल ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था से एक ओर लोकतंत्र प्रभावित हो रहा है तो दूसरी ओर बच्चों की शिक्षा पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ रहा है।प्रोफेसर दलाल ने कहा कि SIR के नाम पर किए जा रहे घर-घर सर्वे में कई पात्र और वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने का खतरा बना हुआ है।

विशेष रूप से गरीब,मजदूर,किरायेदार, बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता इस प्रक्रिया से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई मामलों में घर पर न मिलने या दस्तावेज़ तुरंत उपलब्ध न होने के कारण नामों को संदिग्ध मान लिया जाता है,जो पूरी तरह अनुचित है।उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षकों को बड़े पैमाने पर चुनावी और सर्वे कार्यों में लगाया जा रहा है,जिससे स्कूलों में पढ़ाई बाधित हो रही है।पहले से ही शिक्षकों की कमी झेल रहे सरकारी स्कूलों में कक्षाएँ प्रभावित हो रही हैं और इसका सीधा नुकसान बच्चों के भविष्य पर हो रहा है।

प्रोफेसर दलाल ने कहा किशिक्षकों का मुख्य दायित्व बच्चों को शिक्षा देना है,न कि प्रशासनिक या चुनावी कार्यों में उलझाना।जब शिक्षक कक्षा से बाहर होंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बनी रहेगी?उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव से ठीक पहले किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से कट जाता है,तो वह अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो जाता है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक ड्यूटी में व्यस्त रहने से बच्चों की पढ़ाई,परीक्षा तैयारी और बुनियाद कमजोर होती जा रही है।

प्रोफेसर सीमा प्रवीण दलाल ने चुनाव आयोग और प्रशासन से मांग की किवोटर लिस्ट से नाम काटने से पहले उचित सूचना और सुनवाई सुनिश्चित की जाएSIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जाएशिक्षकों की जगह अन्य विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएताकि लोकतंत्र भी सुरक्षित रहे और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित न हो।उन्होंने कहा,वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण जरूरी है,लेकिन यदि इस प्रक्रिया में वोट का अधिकार और बच्चों की शिक्षा दोनों प्रभावित हों, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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