
वॉइस ऑफ़ बहादुरगढ़ न्यूज़ :
रोहतक ।
दुनिया के प्रसिद्ध नाटककार चेख़व के चर्चित नाटक सेडक्शन का स्थानीय स्कॉलर्स रोज़री स्कूल में प्रभावशाली मंचन किया गया। एक घंटे तक मंच पर चले रोमांस और कॉमेडी के इस तमाशे ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा की ओर से हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ़ परफोर्मिंग आर्ट्स (हिपा) के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का निर्देशन जाने माने रंगकर्मी विश्वदीपक त्रिखा ने किया। छात्र कल्याण विभाग, मदवि, रोहतक के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. जगबीर राठी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। डॉ. दीपक भारद्वाज एडवोकेट और संघ के जिला प्रमुख संजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।अपने संबोधन में राठी ने कलाकारों के अभिनय और विश्वदीपक त्रिखा के जज़्बे और रंगमंच के प्रति उनके समर्पण की भरपूर सराहना की, जो शहर में रंगकर्म के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने के प्रयासों में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि सेहत की दिक्कतों का बावजूद वे लगातार लोगों के लिए नए नए नाटकों का मंचन करवाते रहते हैं। डॉ. दीपक भारद्वाज एडवोकेट और संघ के जिला प्रमुख संजय शर्मा ने कहा कि नाटक लोगों को संवेदनशील और कल्पनाशील बनाते हुए उनमें मानवीय मूल्यों का सृजन करता है।नाटक की कहानी में पीटर नाम का एक युवा दावा करता है कि वह किसी भी महिला को अपने प्यार में डाल सकता है। वह यह सब उससे बिना मिले और बिना बात किए भी कर सकता है। इसी की बानगी पेश करते हुए वह एक धनाढ्य व्यक्ति निकोलिस की सुंदर पत्नी आयरीना को निशाना बनाता है। पीटर निकोलस के माध्यम से आयरीना को ऐसे संदेश भेजता है कि एक वही है जो सच में आयरीना को समझता है। वह उसकी हद से ज़्यादा तारीफ करता है, उसे दुनिया की सबसे हसीन महिला बताता है और यह भी कहता है कि वह एक महिला के प्यार में मरा जा रहा है। शुरू में आयरीना उसे इग्नोर करती है, उसके बारे में बुरा भला कहती है, परन्तु धीरे धीरे वह उसकी तरफ आकर्षित होने लगती है और फिर उसके प्यार में पड़ जाती है। लेकिन नाटक के अंत में वह पीटर की इंसानियत को झकझोर कर उसे औरतों को अपने जाल में फसाने और लोगों की दुःखद गृहस्थी को बरबाद करने का काम न करने के लिए प्रेरित करने करने में कामयाब हो जाती है। नाटक में आयरीना की भूमिका गुरुग्राम की वरिष्ठ अभिनेत्री सुहासिनी ने निभाई। अविनाश सैनी ने निकोलस और अभिषेक ने पीटर के किरदारों को जीवंत किया। संगीत विकास रोहिल्ला और सुभाष नगाड़ा का रहा। मेकअप अनिल शर्मा ने किया। मंच सज्जा व प्रकाश व्यवस्था की ज़िम्मेदारी मनीष खरे तथा जगदीप जुगनू ने संभाली। ड्रेस पूजा कोचर की रही और प्रोडक्शन में शक्ति सरोवर त्रिखा व समीर शर्मा रहे। मंच संचालन आध्या वाधवा ने किया।”सेडक्शन” के बाद भ्रूण हत्या के प्रति जागरूक करती हुई एक लघु नाटिका “कन्या भ्रूण का श्राप” का मंचन भी किया गया। शहर के प्रमुख साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. मधुकांत द्वारा लिखित इस नाटिका में दिखाया गया कि अगर कन्या भ्रूण हत्या नहीं रुकी तो समाज का तानाबाना किस तरह बिगड़ जाएगा। नाटक में सोनिका पंवार, डॉ. रजत शर्मा और कवि पवन गहलोत ने मुख्य भूमिका निभाई। नाटिका का निर्देशन डॉ. रजत शर्मा ने किया। प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।इस अवसर पर गुरुग्राम से अर्जुन वशिष्ठ व ऋतुराज, वरिष्ठ सर्जन डॉ. आर एस दहिया, विश्वदीपक त्रिखा, कृष्ण नाटक, अनिल खटक, डॉ. कपिल कौशिक, गुलाब सिंह खांडेवाल, अर्चना कोचर, श्रीभगवान शर्मा, कृष्ण लाल गिरधर, सर्वजीत अहलूवालिया, सुजाता, गुरदयाल, अजय शर्मा, डॉ. मधुकांत, जगदीप, पूनम, पंकज शर्मा, डॉ. देवेन्द्र, डॉ. स्वर्णा देव, रमेश सैनी, अमित शर्मा, करनल सिंह, गर्व कोचर सहित अनेक नाटक प्रेमी उपस्थित रहे।

