बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय और द बायोलॉजिकल एग्री-सॉल्यूशंस एसोसिएशन के बीच हुआ एमओयू, कृषि शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगा नया आयाम

बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय और द बायोलॉजिकल एग्री-सॉल्यूशंस एसोसिएशन के बीच हुआ एमओयू, कृषि शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगा नया आयाम

वॉइस ऑफ़ बहादुरगढ़ न्यूज़ :
रोहतक ।
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कृषि विभाग ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए द बायोलॉजिकल एग्री-सॉल्यूशंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, फरीदाबाद के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ। जिस पर कंपनी की ओर से सीईओ विपिन सैनी तथा बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कृषि विभाग की ओर से विभागाध्यक्ष (एचओडी) डॉ. दिलबाग सिंह अहलावत ने हस्ताक्षर किए।
यह समझौता आधुनिक कृषि चुनौतियों के समाधान, जैविक खेती के विस्तार और विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया है।
इस एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थाएं मिलकर कृषि से जुड़े नवीन शोध, जैविक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, फसल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन आधारित परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगी। इससे कृषि विभाग के विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को वास्तविक खेतों और प्रयोगशालाओं में लागू करने का व्यावहारिक अवसर मिलेगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी. एम. यादव ने कहा कि यह समझौता कृषि शिक्षा को उद्योग और अनुसंधान से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, फील्ड ट्रेनिंग, लाइव प्रोजेक्ट्स और संयुक्त शोध कार्यों का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. मनोज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यह एमओयू विश्वविद्यालय की अकादमिक और अनुसंधान क्षमताओं को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से विद्यार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक कृषि नवाचारों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा और विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत अनुसंधान आधारित संस्थान के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।
कार्यक्रम में डॉ. दिलबाग सिंह अहलावत, डॉ. अंकित गिल एवं डॉ. रवीना सैनी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस समझौते को कृषि प्रणाली को सशक्त बनाने, किसानों के हित में नवाचार को बढ़ावा देने और सतत एवं वैज्ञानिक कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
यह समझौता न केवल विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, बल्कि भविष्य में लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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